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पद्मावत Padmavat Libro EPUB, PDF

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El mejor club de lectura para descargar पद्मावत Padmavat
  • Libro de calificación:
    4.28 de 5 (363 votos)
  • Título Original: पद्मावत Padmavat
  • Autor del libro: Malik Muhammad Jayasi
  • ISBN: -
  • Idioma: ES
  • Páginas recuento:487
  • Realese fecha:1984-05-05
  • Descargar Formatos: AZW, PGD, ODF, CHM, PDF, iBOOKS, FB2, MS WORD
  • Tamaño de Archivo: 14.28 Mb
  • Descargar: 3363
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पद्मावत Padmavat por Malik Muhammad Jayasi Libro PDF, EPUB

सिंहल दवीप (शरीलंका) का राजा गंधरवसेन था, जिसकी कनया पदमावती थी, जो पदमिनी थी। उसने एक सुगगा पाल रखा था, जिसका नाम हीरामन था। एक दिन पदमावती की अनुपसथिति में बिलली के आकरमण से बचकर वह सुगगा भाग निकला और एक बहिलिए के दवारा फँसा लिया गया। उस बहेलिए से उसे एक बराहमण ने मोल ले लिया, जिसने चिततौड आकर उसे वहाँ के राजा रतनसिंह राजपूत के हाथ बेच दिया। इसी सुगगे से राजा ने पदमिनी ( सिंहल द्वीप (श्रीलंका) का राजा गंधर्वसेन था, जिसकी कन्या पदमावती थी, जो पद्मिनी थी। उसने एक सुग्गा पाल रखा था, जिसका नाम हीरामन था। एक दिन पदमावती की अनुपस्थिति में बिल्ली के आक्रमण से बचकर वह सुग्गा भाग निकला और एक बहिलिए के द्वारा फँसा लिया गया। उस बहेलिए से उसे एक ब्राह्मण ने मोल ले लिया, जिसने चित्तौड़ आकर उसे वहाँ के राजा रतनसिंह राजपूत के हाथ बेच दिया। इसी सुग्गे से राजा ने पद्मिनी (पदमावती) के अद्भुत सौंदर्य का वर्णन सुना, तो उसे प्राप्त करन के लिये योगी बनकर निकल पड़ा। अनेक वनों और समुद्रों को पार करके वह सिंहल पहुँचा। उसके साथ में वह सुग्गा भी था। सुग्गे के द्वारा उसने पदमावती के पास अपना प्रेमसंदेश भेजा। पदमावती जब उससे मिलने के लिये एक देवालय में आई, उसको देखकर वह मूर्छित ह